Monday, August 27, 2012

उजियारा बेइमान हो गया
अंधियारे का मेहमान हो गया
जिंदगी की नाव चलेगी कैसे
हर कतरा तूफान हो गया

च्कोयले की दलाली में हाथ कालाज् यह कहावत अब चरितार्थ होते दिखाई दे रही है। केन्द्र की कांग्रेस नीत सरकार से लेकर प्रदेश की भाजपा सरकार के दामन पर भी भ्रष्टाचार के छीटे पड़े हैं। भाजपा नेता कांग्रेस सरकार के मुखिया प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर निशाना साधकर उनसे इस्तीफा मांग रहे हैं तथा संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही नहीं लने दे रहे है तो कोयला नीति पर कांग्रेसी भाजपा की राज्य सरकारों पर आरोप मढ रहे हैं क्योंकि इन राज्य सरकार के मुखिया ने कोयला आबंटन नीति में परिवर्तन नहीं करने का आग्रह पत्र भेजा था। कैग की रिपोर्ट को लेकर घमासान मचा है, प्रमुख विपक्षी दल तथा एनडीए घटक की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा कैग की रिपोर्ट को विश्वसनीय मानकर प्रधानमंत्री से इस्तीफा मागं रही है वही प्रदेश में भाजपा की सरकार है और यहां विस में प्रस्तुत कैग की रिपोर्ट को भाजपा सरकार तवज्जो नहीं दे रही है। एक आईएएस अफसर ने तो प्रदेश में कैग की रिपोर्ट पर बयानबाजी कर नयी परंपरा शुरू कर दी है।
केन्द्र में सीएजी ने 2004 से 2012 तक कोल आबंटन पर सरकार को एक लाख 85 हजार करोड़ के नुकसान की संभावना प्रकट करते हुए आपत्ति की है इसी को लेकर लोकसभा और राज्य सभा में बवाल मचा हुआ है। भाजपा सदन में प्रधानमंत्री का जवाब नही इस्तीफा मांग रहा है यह बात और है कि इलेक्ट्रानिक्स चैनलों में वाद-विवाद में इसी मसले पर नेता हिस्सा ले रहे हैं।
छग सीएजी की रिपोर्ट
छत्तीसगढ़ में सीएजी की रिपोर्ट में कोयला माले में 1052 करोड़ के नुकसान और अनियमितता पर सवाल खड़े किये गये है पर सरकार ने इसे गंभीरता से नहीं लिया है। सरकार के मुखिया के करीब रहने वाले एआईएएस अफसर ने तो सीएजी की रिपोर्ट पर ही नकारात्मक टिप्पणी करके नई परंपरा इजात की है। भाजपा के अध्यक्ष नितिन गड़करी के करीबी और कारोबारी साझेदार अजय संचेती को कोल ब्लाक आबंटित करना भी चर्चा में है।
25 जुलाई 2007 को भारत सरकार ने छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम को अनुशंसा की कि किसी सरकारी अथवा कोल माईन्स एक्ट 1973 के तहत काम करने वाली किसी कंपनी को कोल ब्लाक के दोहन वितरण का काम सौपा जाए या भागीदार बनाया जाए। निगम ने 3 जुलाई 2008 को निविदाएं आमंत्रित की। कुल 34 कंपनियों ने तीन करोड़ 10 लाख के कुल 62 निविदा प्रपत्र खरीदे। 25 जुलाई को निविदा खोली गई। भटगांव 2 के लिये नागपुर की कंपनी एमएमएस इन्फ्रास्ट्रक्चर-सोलार एक्सलोसिव तथा जिंदल स्टील पावर लिमिटेड के ही प्रस्ताव विचार योग्य पाये गये? जिंदल ने 540 और एसएमएस इफ्रास्ट्रक्चर ने 552 रूपये प्रति मीट्रिक टन की दर से प्रस्ताव दिया था इसलिये भटगांव 2 में खनन का ठेका एसएमएस को सौप दिया गया।
भटगांव 2 (एक्सटेंशन) के लिये 14 कंपनियों ने प्रपत्र खरीदा लेकिन खनिज निगम ने केवल एसएमएस इफ्रास्ट्रक्चर और मुम्बई की एसीसी को ही विचार योग्य पाया इसमें एसीसी मुम्बई को खनन योग्य अनुभव नहीं होने के नाम पर उसके प्रस्ताव पर चर्चा नहीं की और एसएमएस इफ्रास्ट्रक्चर सोलार एक मात्र बची कंपनी को 129.60 पैसे प्रति मीट्रिक टन पर खनन का ठेका दे दिया। कैग ने यही आपत्ति की। भटगांव 2 के कोल ब्लाक के खनन का ठेका 552 रूपये प्रति मीट्रिक टन पर दिया गया वही भटगांव (एक्सटेंशन) का ठेका 129.60 पैसे प्रति मीट्रिक टन में दिया गया। कैग की यह भी आपत्ति की है कि दोनों कोल ब्लाक आसपास है फिर खनन ठेका में अंतर क्यों? सवाल यह भी उठ रहा है कि भटगांव 2 (एक्सटेंशन) में जब निविदा खोलने पर एक ही कंपनी का प्रस्ताव सही पाया गया तो स्वच्छ और प्रतिस्पर्धा के नाम पर पुन: निविदा आमंत्रित क्यों नहीं कई गई? वैसे इफ्रास्ट्रक्चर-सोलार को भागीदार ही खनन में बनाया गया है। 51 प्रतिशत हिस्सा खनिज निगम को मिलेगा तो 49 प्रतिशत हिस्सा कंपनी को। सवाल फिर उठ रहा है कि जब सरकार का हिस्सा 51 प्रतिशत है तो एक कंपनी को निविदा योग्य पाने के बाद भी अधिक लाभ के लिये पुन: निविदा आमंत्रित क्यों नहीं की गई। ज्ञात रहे कि एसएमएस इन्फ्रास्ट्रक्चर-सोलार एक्सलोसिव कंपनी भाजपा के रास सदस्य तथा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीति गड़करी के करीबी अजय संचेती की है।
वाणिज्यकर और संचेती
अजय संचेती का नाम राज्य में पहले भी चर्चा में आ चुका है। दुर्ग के एक नेता के रिश्तेदार अजय संचेती की कंपनी ने 1999-2003 के मध्य दुर्ग-राजनांदगांव के बीच एक बायपास रोड का निर्माण किया था। बायपास निर्माण के बाद कंपनी वाणिज्य कर विभाग ने 17 करोड़ 35 लाख की वसूली के लिये सम्पत्ति कुर्क करने का आदेश जारी किया। विभाग ने सारी सम्पत्तियां और बैकों ने 21 खाते भी सील कर दिये परन्तु 15 सितंबर 2012 को अचानक वाणिज्य कर विभाग ने सभी सम्पत्तियों सहित बैंक खाते कंपनी को लौटा भी दिये। सूत्र कहते है कि कागजों में हेरफेर करके आनन फानन नई कंपनी बताकर मामला सुलझ गया। सवाल यह उठ रहा है कि वाणिज्य कर विभाग ने सम्पत्ति कुर्क करने का आदेश यदि गलत दिया था तो दोषी अफसर के खिलाफ कार्यवाही क्यों नहीं की गई, सम्पत्ति कुर्क करने वाले अफसर ने सम्पत्ति छोडऩे के कारणों को सार्वजनिक क्यों नहीं किया।
अमन सिंह पर निशाना
आईआरएस जैसी अखिल भारतीय स्तर की नौकरी से इस्तीफा देकर संविदा आधार पर ऊर्जा सचिव और मुख्यमंत्री के सचिव अमन सिंह फिर चर्चा में है वैसे भी मुख्यमंत्री का सचिव संविदा नियुक्ति में हो यह किसी प्रदेश में का पहला मामला है। कुछ सालों के लिये राष्ट्रीय स्तर की नौकरी छोडऩे का भी यह संभवत: पहला मामला होगा। हाल ही में नागवंशी नामक व्यक्ति ने सूचना के अधिकार के तहत जानकारी लेकर उच्च न्यायालय बिलासपुर में ऊर्जा विभाग की अनियमितता को लेकर जनहित याचिका लगाकर 7200 करोड़ के घोटाले का आरोप लगाया है उनके द्वारा 2723 पृष्ठों के दस्तावेजों सुबुतों के लिये पेश किया गया है और इस आधार पर उच्च न्यायालय ने ऊर्जा सचिव अमन सिंह सहित विद्युत मंडल के जिम्मेदार अधिकारियों को तलब किया है। यह मामला विद्युत पोल ट्रांसफार्मर खरीदी को लेकर है। इधर बजट सत्र में सीएजी की रिपोर्ट में भी ऊर्जा विभाग और बिजली कंपनियों के 1700 करोड़ से अधिक की अनियमितता को उजागर किया था। सीएजी के अनुसार निजी विद्युत उत्पादकों से बिजली खरीदी में विद्युत वितरण कंपनी को एक वर्ष में 420 करोड़ और विद्युत पारेषण कंपनी को में ट्रांसमीशन हानि होने के कारण 5 वर्षों में 1122 करोड़ रूपयों का नुकसान हुआ है। अटल ज्योति योजना में विलंब और भ्रष्टाचार के कारण 115 करोड़ का नुकसान राज्य को हुआ है। विद्युत मंडल का विखंडन करके नई कंपनियां बनाई गई जिससे वार्षिक बजट में 80 से 220 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी कर दी गई। बहरहाल अमन सिंह उच्च न्यायालय में क्या जवाब देते है इसी का इंतजार है।
बैस की साफगोई
छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ सांसद तथा पूर्व केन्द्रीय मंत्री पार्षद विधायक होकर सांसद का सफर तय करने वाले रमेश बैस गंभीर नेता माने जाते है वे लोकसभा में भाजपा के मुख्य सचेतक भी है। समय समय पर वे भाजपा की प्रदेश सरकार को आईना दिखाने का काम भी करते रहते हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ के नियंत्रक महालेखा कार (सीएजी) की रिपोर्ट की जांच के लिये विधानसभा की लोकलेखा समिति को नहीं सौंपने पर कड़ा आपत्ति की है। उन्होंने कहा है कि सीएजी एक संवैधानिक संस्था है, जिसका सभी का आदर करना चाहिए। लोकलेखा समिति इस मामले में जिन लोगों को दोषी करार देती है उनके खिलाफ राज्य सरकार को सख्त कार्यवाही करनी चाहिये।
रमेश बैस ने कहा कि छत्तीसगढ़ सीएजी की रिपोर्ट में खनिज ऊर्जा समेत कई विभागों पर विपरीत टिप्पणी की गई है पर अफसोस है कि इसे अब तक जांच के लिये लोक लेखा समिति को नहीं सौपा गया है। उनका कहना है कि सीएजी एक संवैधानिक संस्था है और उसका दायित्व सरकार के खर्चों की समीक्षा करना है।
और अब बस
द्य मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने आईबी में तैनात विश्वरंजन को उनकी शर्तों पर अनुरोध करके छत्तीसगढ़ लाकर डीजीपी बनाया था। डीजीपी पद से समय पूर्व हटाने के बाद उन्होंने हाल ही में तत्पर संस्था के बैनर तले एक संगोष्ठी में रमन सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
द्य मुख्य सचिव नहीं बनाये जाने से राज्य सरकार से नाराज चल रहे बी.के.एस. रे ने योजनाओं पर भ्रष्टाचार तथा पारदर्शिता के अभाव की बात करने राज्य सरकार की नीतियों की भी जमकर आलोचना की है।

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